हूआ दीदार जो आपका
चाँद को हकिकत में
पा लिया हमने ...
लम्हे ठहर गये और
ख्वाब को हकिकत में
गलें से जो लगा लिया आपने
स्वर्ग को धरती पर हीं
इष्क की इन वादीयों में
दिल की गहराइयों को
-प्रसाद गोडांबे
No comments:
Post a Comment